Pollution: बढ़ता प्रदूषण कहीं बढ़ा न दे हार्ट अटैक का खतरा, हार्ट को हेल्दी रखने के लिए करें ये जरूरी उपाय

Nov 19, 2024
Health and fitness
Pollution: बढ़ता प्रदूषण कहीं बढ़ा न दे हार्ट अटैक का खतरा, हार्ट को हेल्दी रखने के लिए करें ये जरूरी उपाय

प्रदूषण से फेफड़ों को तो नुकसान होने का खतरा रहता ही है, इसके अलावा हृदय रोगों के शिकार जो लोग लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहते हैं उनमें हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर जैसी दिक्कतों का जोखिम बढ़ जाता है।वायु प्रदूषण हमारी सेहत के लिए कई प्रकार से खतरनाक है। राजधानी दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर जिस तरह से बढ़ता जा रहा है उसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। हवा की खराब होती गुणवत्ता को देखते हुए दिल्ली में ग्रैप-4 लागू कर दिया गया है ताकि प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सके।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, जिन लोगों को पहले से ही किसी प्रकार की क्रोनिक बीमारी है, उनके लिए प्रदूषित हवा और भी दिक्कतें बढ़ाने वाली हो सकती है, इसलिए प्रदूषण से बचाव को लेकर गंभीरता से ध्यान देते रहना जरूरी है।


डॉक्टर कहते हैंप्रदूषण से फेफड़ों को तो नुकसान होने का खतरा रहता ही है, साथ ही लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से मस्तिष्क से संबंधित बीमारियों का जोखिम हो सकता है।  इसके अलावा जिन लोगों को पहले से हृदय स्वास्थ्य की समस्या रही हो उन्हें प्रदूषण वाले दिनों में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। हवा की खराब होती गुणवत्ता हृदय के लिए गंभीर दिक्कतें बढ़ाने वाली हो सकती है। हवा में बढ़ रहे हैं खतरनाक प्रदूषक


स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्मॉग का ये मौसम सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन गया है,। वाहनों से निकलने वाला धुंआ, औद्योगिक गतिविधियां, पराली और निर्माण कार्यों की धूल जैसे कारक हवा में पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड के स्तर को बढ़ाने वाली हो सकती है। 

स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण हर साल वैश्विक स्तर पर लगभग 4.2 मिलियन (42 लाख से अधिक) असामयिक मौतें होती हैं, जिनमें से कई हृदय रोगों से जुड़ी होती हैं। यही कारण है कि प्रदूषण वाले दिनों में हृदय स्वास्थ्य को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

आइए जानते हैं कि जो लोग हृदय रोगों से पीड़ित हैं वो इन दिनों में किस तरह से सेहत का ध्यान रख सकते हैं?हृदय की गंभीर समस्याओं का बढ़ सकता है खतरा

वायु प्रदूषण के कई नुकसान हैं, हृदय रोगों के शिकार जो लोग लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहते हैं उनमें हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर जैसी दिक्कतों का जोखिम बढ़ सकता है। एक अध्ययन में पाया गया कि वायु प्रदूषण में मौजूद अल्ट्राफाइन कणों के संपर्क में आने के कारण दिल के दौरे की समस्याएं ट्रिगर हो सकती हैं।

इसके अलावा प्रदूषण रक्त वाहिकाओं को संकरा और सख्त बना देता है, जिससे रक्त का प्रवाह कठिन हो जाता है और थक्के बनने की आशंका बढ़ सकती है। इसके अलावा वायु प्रदूषण के कारण हृदय की विद्युत प्रणाली भी प्रभावित हो सकती है, जिससे दिल की धड़कनों में अनियमितता का खतरा हो सकता है। कैसे रखें हृदय का ख्याल

अपने हृदय स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के जोखिमों को कम करने के लिए आप कुछ उपाय कर सकते हैं।
  • वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से बचें। सुबह और शाम के समय अनावश्क रूप से घर से बाहर न जाएं।
  • जब वायु गुणवत्ता खराब हो, तो अंदर रहें और खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें।
  • जब आपको बाहर जाने की जरूरत हो, तो मास्क जरूर पहनें।
  • इनडोर वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए एयर क्लीनर का उपयोग करें।
  • नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और स्वास्थ्य की जांच करवाएं और स्वस्थ आहार लें।ये आदत सबसे ज्यादा हानिकारक

    डॉक्टर कहते हैं, हृदय को स्वस्थ और फिट रखने के लिए जरूरी है कि आप उन चीजों से दूरी बनाकर रखें जिससे हृदय स्वास्थ्य पर असर होता है। विशेषतौर पर धूम्रपान से दूरी बनाना सबसे जरूरी है। धूम्रपान करने से आपकी धमनियों में प्लाक जम सकता है, जो उन्हें संकीर्ण और अवरुद्ध कर सकती हैं। इससे आपके दिल और शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंचने वाले ऑक्सीजन और रक्त की मात्रा कम हो जाती है।

    धूम्रपान करने से दिल का दौरा पड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है। प्रदूषित वातावरण और धूम्रपान की आदत इन जोखिमों को और भी बढ़ाने वाली हो सकती है, इसलिए धूम्रपान छोड़ना आपके लिए सबसे जरूरी है।नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

    अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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