भारतीय वैदिक ज्योतिष

Dec 13, 2023
Astrology
भारतीय वैदिक ज्योतिष

भारत में वैदिक काल से ही ज्योतिषीय गणनाओं का प्रयोग होता रहा है। वैदिक ऋषियों ने यद्यपि इसे अधिक उपयोगी व सारगर्भित बनाते हुए काल गणना के क्रम का निरधारण सूर्य व चंद्रमा की गतियों के द्वारा किया। वैदिक यज्ञों की सम्पन्नता हेतु शुभ समय का निर्धारण व समाजिक जीवन के तिथि पर्व सहित कृषि आदि राजकीय व्यवस्थाओं के संचालन में वैदिक काल में भारतीय वैदिक ज्योतिष के प्रयोग के संबंध में स्थान-स्थान पर जानकारी प्राप्त होती है। ऋग्वेद काल में भारतीय ऋषियों द्वारा चंद्र व सौर वर्षगणना के ज्ञान को विस्तारित किया गया था। इसी प्रकार दिन व दिनमान, रात्रिमान नक्षत्र, ग्रह व राशियों का भली-भांति ज्ञान अर्जित कर उनके शुभाशुभ प्रभाव को लोक हितार्थ प्रेषित किया करते थे। ऋग्वेद का समय लगभग शक संवत् से 4000 वर्ष पहले का समय है। इसी प्रकार यजुर्वेद में 12 महीनों के नामों का उल्लेख मधु, माधव से तपस्य आदि रखने के प्रमाण हैं। किन्तु समय बीतने के साथ वैदिक ज्योतिष ने और उन्नति की और मास के नामों को नक्षत्र के नामो से जाना जाने लगा जैसे- चैत्र माह का नाम चित्रा नक्षत्र इसी प्रकार 12 महीनों के नाम को बारह नक्षत्रों के आधार पर रखा गया है। तिथि की गणनाएं अन्य ज्योतिषीय सिद्धान्त हमें प्राप्त होते हैं। वैदिक ज्योतिष काल में प्राण से युग तक गणनाएं प्राप्त होती हैं। इसी प्रकार रामायण व महाभारत काल में स्थान-स्थान पर ग्रहों राशियों सहित ज्योतिष का वर्णन है।भारतीय वैदिक ज्योतिष में वैदिक ज्योतिष का प्रचलन बराहमिहिर के समय में ही हो चुका था। जिसमे ज्योतिष के विभिन्न पहलुओं का विस्तार हुआ है। जिसके द्वारा राशि ग्रह नक्षत्रों के फल कथनों का वर्णन भी मिलता है। भारतीय ज्योतिष को दूसरे शब्दों मे हिन्दू ज्योतिष या वैदिक ज्योतिष भी कहा जाता है। इसका सीधा सा मतलब की आपकी स्वसहायता करने का वैदिक सिद्धांत। वेदों मे ज्योतिष शास्त्र का विस्तृत विवरण हम देख सकते है। हमारी प्राचीन सभ्यता के बारे मे लिखे लेखो से हमारे पूर्वजो की विचारधारा का एवं भविष्यदृष्टा होने का पता चलता है। ज्योतिष शास्त्र मे कर्म को अत्यंत महत्ता दी गयी है। क्यूंकि पिछले जन्म मे किये गए कर्मफलो के आधार पर ही इस जन्म मे प्रारब्ध बनता है जो ज्योतिष शास्त्र द्वारा प्रकाशमान है। पुराणों मे भी हम वेदांग ज्योतिष के बीज स्पष्ट रूप से पाते है।  वेदों की इस शाखा ज्योतिष यानि वेदांग का सम्बन्ध दैनिक सर्वव्यापकता से है, यह विवरण पुराणों मे भी मिलता है। ज्योतिष को मुख्य रूप से तीन भागो मे विभाजित किया गया है।  क्रमशः सिद्धांत, संहिता एवम् होरा।  यहाँ हम संक्षिप्त जानकारी आप लोगो के सम्मुख रखेंगे। हम अपने आगे के लेखों मे हम इन पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

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